Jaane Kahaa ??? The Revolution
अपडेट-2
फिल्मी रील चल रही थी। समाज क़ैदी को सन्मान की नज़रो से कभी नही देख पाता। समाज कहता है गुनेह्गार हमेशा गुनेह्गार ही रहता है।
लेकिन जैल मे आकर उसने महसूस किया था की जितना गुनेह्गार क़ैदी है उसमे से ज़्यादा
लोगो को समाज ने ही गुनेह्गार बनाया है। पहले तो उसको भी क़ैदी से नफ़रत होती थी, क्योकि वो खुद अपने
आप को गुनेह्गार नही समजता था। उसने जो गुनाह किया था वो तो सोच समजकर किया गया आंदोलन
था। समाज मे चल रहे गन्दे पॉलिटिक्स के खिलाफ
जंग थी। एक ऐसा रीवोल्यूशन शुरू किया था जिसमे नवभारत का संचार होने वाला था। हाला
की उन्हे पता था की कुछ दोस्तो के रीवोल्यूशन से कभी कोई समाज मे परिवर्तन नही आता, कोई देश, समाज का नवसिंचन नही
होता, लेकिन फिर भी हालत
ऐसे थे की उनको अपनी आत्मा इस रेवोल्यूशन पर कार्य करने पर मजबूर कर गयी। एक तरह से उसको
या उनके दोस्तो को मानसिक आनंद था की कम से कम वो लोग तो उस समाज से परे थे जो लोग
केवल सहन करना जानते थे, खुद बिना लडे ही मरना जानते थे। सिस्टम के खिलाफ आवाज़ उठाने की हिम्मत बहुत कम लोग ही जुटा पाते है। वो और उनके दोस्त ने वो काम किया था की पूरे समाज, स्टेट और देश को हिला
दिया था। पॉलिटिक्स के नाम पर राज करने वाले हेवान, या धर्म के माध्यम से अत्याचार करनेवाले कामात्मा से भरे इस
समाज को नयी दिशा दिखाने की कोशिश उन्होने की थी। और वो भी सोच समाज कर किया गया एक
फूलप्रूफ प्लान, जिसमे ग़लती संभव ही नही थी। और वैसे भी सबकुछ हो जाने पर भी पुलिस उन तक 5 महीने तक नही पहुच पाई थी। अख़बार मे भी
यही लिखा जाता था की पुलिस हाथ मलकर रह गयी
है और क्रांतिकारी हवा मे ओज़ल हो चुके है। बस एक साजन ने ग़लती की और सारा भान्डा
फुट गया जिसकी सब से बड़ी सज़ा शायद जय किशोरीलाल पुरोहित को मिली थी।
जय गुजरात के सौराष्ट्र मे पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के बॉर्डर के बीच खड़ा हुवा और सौराष्ट्र गौरव गिरनार पर्वत स्थित जूनागढ़ का रहने वाला एक ब्राहमिन था। उसके बापदादा बरसो पहले रजवाड़े मे राजपुरोहित थे। लेकिन जूनागढ़ के नवाब ने हिन्दुस्तान की जगह पाकिस्तान मे जूनागढ़ स्टेट मर्ज करने की सोची थी। सरदार वल्लभभाई पटेल की सतर्कता से जुनगढ के नवाब की एक न चली और आज जूनागढ़ हिन्दुस्तान का हिस्सा है।
जय के पिताजी किशोरीलाल तक बापदादा कि वारसाइ पहुची तब तक तिजोरी खाली हो चुकी थी। किशोरीलाल ने ब्राहमिन का काम शुरू किया और बचपन से ख्वाहिश थी की उसका बेटा एक होनहार साइंटिस्ट बने। क्योकि वो खुद एक अच्छे साइंटिस्ट थे और उनकी पढ़ाई यात्रा अधूरी रह गयी थी। उसकी खास वजह ग़रीबी तो थी ही लेकिन और एक वजह थी।
किशोरीलाल के पिताजी यानी जय के दादा श्री नारायण प्रसाद पुरोहित और राजस्थान के जोधपुर के राजघराने के राजपुरोहित श्री गंगाधर साहनी की गहरी दोस्ती थी। लेकिन गंगाधर का जल्द ही स्वर्गवास हो जाने से सारी रेस्पॉन्सिबिलिटी नारायण प्रसाद ने उठाई थी। स्टेट के विलिनीकरण के बाद जोधपुर के राजघराने यानी राजपुरोहित की मिल्कत उसके बेटे विक्रम साहनी के पास आई जो साहनी परिवार का इकलौता वारीस था।
विक्रम और किशोरीलाल की दोस्ती भी गहरी हुई थी
क्योकि दादा परदादा से दोनो परिवार की दोस्ती चली आ रही थी। दोनो परिवार का कार्य समान
था और पूरे हिन्दुस्तान मे उसके जैसा पुरोहित कार्य कोई नही कर सकता था। विक्रम साहनी
पहले से ही क्षत्रिय के साथ बड़ा हुवा था और खुद का नेचर भी एक सैनिक जैसा था। तो
महाराजा ऑफ जोधपुर की मेहरबानी से नारायण प्रसाद की राय लेकर एक राजपुरोहित का बेटा
आर्मी मे भर्ती किया गया। दूसरी वजह ये भी थी की विक्रम मे रजवाड़े की कई गंदी आदते
पहले से पड चुकी थी। सुर, शराब और सुंदरी यानी ट्रिपल S का शौख लग चुका था। आप जानते ही होंगे की गुजरात मे दारूबंधी
है इसलिए और पुराने संस्कार खून मे होने की वजह और जूनागढ़ एक संस्कार नगरी भी है उसकी
वजह से किशोरीलाल को कभी ये गंदी आदते नही लगी। नारायनप्रसाद ने यही सोचा की कुछ और
काम ना आए लेकिन कम से कम हिन्दुस्तान के काम तो आए यही वजह थी विक्रम की आर्मी जॉइंट
करवाने मे।
जूनागढ़ के पुरोहित परिवार और जोधपुर के साहनी परिवार की दोस्ती गहरी थी। वैसे किशोरीलाल की एकलौती बहन सुनंदा को विक्रम पसंद भी करता था। लेकिन नारायण प्रसाद को विक्रम के बारे मे थोड़ी बहुत जानकारी थी इसलिए वे कभी इस बात के लिए राज़ी नही होंगे ये विक्रम अच्छी तरह जनता था। उसने भी कभी इस बात को न तो नारायण प्रसाद को कही, न तो सुनंदा को या न तो किशोरीलाल तक पहुचने दी। बस अपना प्रेम मन ही मे रखा।
यहा किशोरीलाल ने साइन्स मे दिलचश्पी दिखाई और वहा विक्रम सुर शराब और सुंदरी का शौखीन हो गया। लेकिन फिर भी दोस्ती मे कुछ दरार नही आई। किशोरीलाल पहले से ही धर्म और साइन्स को साथ मे रखकर चलता था। कोई भी धार्मिक कार्यक्रम का महत्व साइन्स से समजाता भी था और लोगो को समजाता भी था।
किशोरीलाल के बारे मे एक ऐसी भी बाते समाज मे चल रही थी की उसने कुछ ऐसे साइन्स के इन्स्ट्रुमेंट्स बनाए है की इंडिया का नाम पूरे वर्ल्ड मे छा जाए। लेकिन ये भी कहा जाता था की वो सब इन्स्ट्रुमेंट्स अधूरे है क्योकि किशोरीलाल को पैसे और सरकार की मदद नही मिली और उसने अपना कार्य आधा छोड़ दिया था। सच्चाई सिर्फ़ किशोरीलाल और विक्रम ही जानते थे।
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दोनो परिवारो के बीच एकदुसरे के घर आनाजाना स्वाभाविक था। जब भी विक्रम जूनागढ़ आता था तब किशोरीलाल उसे अपनी अजीब अजीब संसोधन की बाते बताता रहता था। गिरनार की तलेटी के आसपास घना जंगल है और तलेटी जूनागढ़ सिटी से 5 km दूरी पे है। रास्ता भी उस वक़्त मे खराब हुवा करता था। आजकल तो कई धरमशाला, होटेल्स गिरनार तलेटी के आसपास हो चुके हे। लेकिन ये बात है 60 और 70 दशक के बीच की। तब रास्ते बिस्मार हालत मे रहते थे। तलेटी के आसपास घना जंगल हुवा करता था। आजुबाजु कोई वस्ती नही थी। उस तलेटी के आसपास के जंगल मे शहर से दूर किशोरीलाल ने अपनी प्रयोगशाला जमाई थी।
छोटा सा कॉटेज बनाया था। जूनागढ़ की आसपास के
विस्तार मे पीले कलर के बड़े बड़े चुने के पत्थर होते है। वहा मकान ऐसे पत्थरो से बनाए
जाते है। जैसे मकान मे हम लाल कलर की ईट का उपयोग करते है वैसे वहा पर ऐसे पत्थर का
इस्तेमाल किया जाता है। ये कॉटेज भी ऐसे पत्थरो से बनाया गया था। उपर हरी घास बिछाई
गयी थी और घास के उपर एक बैठक जैसा बनाया था, ता की देखने वालो को ये लगे की ये कोई जानवर का शिकार करने के
लिए बनाया गया है। उस कॉटेज मे सिर्फ़ दो कमरे थे। एक सीधा सादा सा बैठने का छोटा सा
कमरा जिसमे पानी का मटका, एक आराम चेर, एक लिखने के लिए टेबल, छोटा सा लेम्प। अंदर के बड़े कमरे मे एक छोटी सी प्रयोगशाला
खड़ी की हुई थी। जहा तरह तरह के साधन होते थे। किशोरीलाल यहा शाम को 7 बजे तक काम किया
करते थे। क्योकि लाइट उस जमाने मे जंगल तक नही पहुची थी, तो अगर रात को कम करना
होता तो बड़े लेम्प वो साथ मे ले जाता था।
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इन्सान हमेशा से संशोधन कि हुइ चिजो से
फयदा कम नुकसान ज्यादा करने की ही सोचता है। सच्चाई यह भी थी की अगर कुछ इन्स्ट्रुमेंट
पूरे बन जाते तो इंडिया को फायदा कम नुकसान ज़्यादा होता था। खास कर के जब जब विक्रम जूनागढ़
आता था तब किशोरीलाल कुछ खास खास बाते उनसे छूपाता था। क्यूकी वो जनता था एक शराबी
या ऐयाशी ज़िंदगी कभी भी भरोसे लायक नही होती। वैसे वो सब बाते विक्रम से शेयर करता
था, कुछ प्राइवेट बाते
भी। लेकिन साइन्स इन्स्ट्रुमेंट्स के बारे मे जब विक्रम कुछ अजीब अजीब सवाल पूछता था
तब से उसने ऐसी बाते करना कम कर दिया था।
और हकीकत मे विक्रम भी कुछ इन्स्ट्रुमेंट्स का फ़ायदा अपने खास मक़सद के लिए करना चाहता था, इसलिए कई बार उसके मूह से उस इन्स्ट्रुमेंट्स के बारे मे जिज्ञासा निकल गयी थी। और शायद विक्रम को भी पता लग गया था की अब किशोरीलाल सब बाते नही बताता जो की खास हुवा करती हो।
और एक दुर्घटना ने दोनो की ज़िंदगी ही पलट दी…………कब और क्यों, जाने कहा ???
The story
31-Jan-2022 01:10 AM
Very nicely written
Reply
PHOENIX
19-Feb-2022 04:06 PM
Thanks
Reply
Pamela
15-Jan-2022 05:09 PM
Very well written
Reply
PHOENIX
15-Jan-2022 05:36 PM
Thanks
Reply
Sandhya Prakash
02-Jan-2022 11:16 AM
Daksh back intresting lag raha h, rajvade ki shan ban rahi h sab
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PHOENIX
02-Jan-2022 11:43 AM
Ya. It's interesting.
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